हाईकोर्ट

क्र.स. हाईकोर्ट का नाम हाईकोर्ट का गठन शामिल राज्य व केन्द्रशासित प्रदेश स्थान खण्ड पीठ अधिनियम के तहत गठन
1. कोलकता हाईकोर्ट 1 जुलाई 1862 पंश्चिम बंगाल,

अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह

कोलकाता पोर्ट ब्लेयर हाईकोर्ट अधिनियम 1861
2. मुम्बई हाईकोर्ट 14 अगस्त 1862 महाराष्ट्र,

गोवा,

दादरा और नगर हवेली, दमण और दीव

मुम्बई नागपुर, पणजी, औरंगाबाद हाईकोर्ट अधिनियम 1861
3. चैन्नई हाईकोर्ट 15 अगस्त 1862 तमिलनाडु,

पांडिचेरी

चेन्नई मदुरै हाईकोर्ट अधिनियम 1861
4. इलाहाबाद हाईकोर्ट 11 जून 1866 उत्तर प्रदेश इलाहाबाद लखनऊ हाईकोर्ट अधिनियम 1861
5. कर्नाटक हाईकोर्ट 1884 कर्नाटक बैंगलोर गुलबर्गा,

धारवाड़

मैसूर हाईकोर्ट अधिनियम 1884
6. पटना हाईकोर्ट 2 सितम्बर 1916 बिहार पटना भारत सरकार अधिनियम 1915
7. जम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट 26 मार्च 1928 जम्मू और कश्मीर श्रीनगर व जम्मू   कश्मीर के महाराजा द्वारा जारी किए गए पेटेंट के आधार पर
8. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट 1947 पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ चंडीगढ़   पंजाब हाईकोर्ट अध्यादेश 1947
9. गुवाहाटी हाईकोर्ट 1948 असम, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, नागालैंड गुवाहाटी ईटानगर, आइजोल, कोहिमा भारत सरकार अधिनियम 1935
10. ओडिशा हाईकोर्ट 26 जुलाई 1948 ओडिशा कटक   ओडिशा हाईकोर्ट आदेश 1948
11. राजस्थान हाईकोर्ट 29 अगस्त 1949 राजस्थान जोधपुर जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट अध्यादेश 1949
12. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट 1 नवम्बर 1956 मध्यप्रदेश जबलपुर इंदौर, ग्वालियर भारत सरकार अधिनियम 1935
13. केरल हाईकोर्ट 1 नवम्बर 1956 केरल, लक्षद्वीप कोचीन   राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956
14. गुजरात हाईकोर्ट 1 मई 1960 गुजरात अहमदाबाद   बाॅम्बे पुनर्गठन अधिनियम 1960
15. दिल्ली हाईकोर्ट 31 अक्टूबर 1966 दिल्ली नई दिल्ली   दिल्ली हाईकोर्ट अधिनियम 1966
16. हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट 1971 हिमाचल प्रदेश शिमला   हिमाचल प्रदेश अधिनियम 1970
17. सिक्किम हाईकोर्ट 1975 सिक्किम गंगटोक   36वां संविधान संशोधन
18. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट 1 नवम्बर 2000 छतिसगढ़ बिलासपुर   मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2000
19. उत्तराखण्ड हाईकोर्ट 9 नवम्बर 2000 उत्तराखण्ड नैनीताल   उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2000
20. झारखण्ड हाईकोर्ट 15 नवम्बर 2000 झारखण्ड रांची   बिहार पुनर्गठन अधिनियम 2000
21. त्रिपुरा हाईकोर्ट 23 मार्च 2013 त्रिपुरा अगरतला   पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) और अन्य संबंधित कानून (संशोधन) अधिनियम, 2012 की धारा 1 की उप-धारा (2)
22. मणिपुर हाईकोर्ट 25 मार्च 2013 मणिपुर इंफाल   पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) और अन्य संबंधित कानून (संशोधन) अधिनियम, 2012 की धारा 1 की उप-धारा (2)
23. मेघालय हाईकोर्ट 25 मार्च 2013 मेघालय शिलांग   पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) और अन्य संबंधित कानून (संशोधन) अधिनियम, 2012 की धारा 1 की उप-धारा (2)
24. तेलंगाना हाईकोर्ट 1 जनवरी 2019 तेलंगाना हैदराबाद    
25. आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट 1 जनवरी 2019 आंध्र प्रदेश अमरावती    

 

हाईकोर्ट- राज्य न्यायपालिका का निर्माण हाईकोर्ट एवं अधीनस्थ न्यायालयों से मिलकर होता है। राज्यों में न्यायापालिका का सर्वोच्च स्तर हाईकोर्ट होता है। भारत में वर्तमान में कुल 25 हाईकोर्ट स्थित है। हाईकोर्ट का उल्लेख भारतीय संविधान के भाग 6 के अनुच्छेद 214 से 231 किया गया है।

 

हाईकोर्ट का गठन- भारत में सर्वप्रथम हाईकोर्ट का गठन 1861 के अधिनियम के अनुसार सन् 1862 में किया गया था। भारत में पहली बार सन् 1862 में एक साथ तीन हाईकोर्ट कलकत्ता हाईकोर्ट, बाॅम्बे हाईकोर्ट, मद्रास हाईकोर्ट स्थापित किये गये थे। 5 जुलाई 2016 को केन्द्रीय मंत्रिमण्डल के प्रस्ताव के द्वारा कलकत्ता हाईकोर्ट, बाॅम्बे हाईकोर्ट व मद्रास हाईकोर्ट का नाम बदलकर क्रमशः कोलकात्ता हाईकोर्ट, मुम्बई हाईकोर्ट व चेन्नई होईकोर्ट कर दिया गया था। हाईकोर्ट के गठन का उल्लेख भारतीय संविधान के भाग 6 के अनुच्छेद 216 में किया गया है।

 

हाईकोर्ट के न्यायाधीश की योग्यताएं- हाईकोर्ट का न्यायाधीश होने के किसी व्यक्ति के पास यह होना चाहिए की वह भारत का नागरिक हो, उसके पास कम से कम 10 वर्षों का न्यायिक पद पर कार्य करने का अनुभव हो तथा कम से कम लगातार 10 वर्षों तक किसी एक या एक से अधिक होईकोर्ट में वकील के रूप में कार्य किया हो। हाईकोर्ट के न्यायाधीश की योग्यताओं का उल्लेख भारतीय संविधान के भाग 6 के अनुच्छेद 217 (2) में किया गया है।

 

हाईकोर्ट के न्यायाधीश की नियुक्ति- हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तथा अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है। राष्ट्रपति के द्वारा हाईकोर्ट के मुख्य न्ययाधीश की नियुक्ति करते समय राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश व राज्यपाल (जिस राज्य में हाईकोर्ट है उस राज्य का राज्यपाल) से सलाह लेता है। राष्ट्रपति के द्वारा हाईकोर्ट के अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करते समय राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तथा राज्यपाल (जिस राज्य में हाईकोर्ट है उस राज्य का राज्यपाल) से सलाह लेता है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश व अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति का उल्लेख भारतीय संविधान के भाग 6 के अनुच्छेद 217 (1) में किया गया है।

 

हाईकोर्ट के न्यायाधीश को शपथ- हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को शपथ उस राज्य का राज्यपाल दिलाता है जिसमें हाईकोर्ट स्थित है। हाईकोर्ट के अन्य न्यायाधीशों को शपथ उसी हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश दिलाता है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश व अन्य न्यायाधीशों की शपथ का उल्लेख भारतीय संविधान के भाग 6 के अनुच्छेद 219 में किया गया है।

 

हाईकोर्ट के न्यायाधीश का कार्यकाल- हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तथा अन्य न्यायाधीशों का कार्यकाल 62 वर्ष की आयु पूर्ण करने तक ही होता है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश व अन्य न्यायाधीशों के कार्यकाल का उल्लेख भारतीय संविधान के भाग 6 के अनुच्छेद 217 (1) में किया गया है। भारत में 1963 से पहले हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तथा अन्य न्यायाधीश का कार्यकाल 60 वर्ष की आयु तक था लेकिन 1963 में भारतीय संविधान के 15वें संविधान संशोधन में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तथा अन्य न्यायाधीश का कार्यकाल 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष की आयु तक कर दिया गया था। वर्तमान में भारत में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश व अन्य न्यायाधीश का कार्यकाल 62 वर्ष की आयु पूर्ण करने तक है।

 

हाईकोर्ट के न्यायाधीश का त्याग पत्र- हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश तथा अन्य न्यायाधीश अपना त्याग पत्र राष्ट्रपति को देते है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश व अन्य न्यायाधीशों के त्याग पत्र का उल्लेख भारतीय संविधान के भाग 6 के अनुच्छेद 217 (1) (क) में किया गया है। हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश तथा अन्य न्यायाधीश अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही अपना त्याग पत्र राष्ट्रपति को देकर अपना पद छोड़ सकते है।

 

हाईकोर्ट के न्यायाधीश को पद से हटाना- अक्षमता व कदाचार के आरोप में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तथा अन्य न्यायाधीशों को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की तरह संसद में महाभियोग प्रस्ताव को पारित कर राष्ट्रपति के द्वारा पद से हटाया जा सकता है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश व अन्य न्यायाधीशों को पद से पटाने की प्रक्रिया का उल्लेख भारतीय संविधान के भाग 6 के अनुच्छेद 217 (1) (ख) किया गया है।

 

हाईकोर्ट के न्यायाधीश सेवानिवृत- हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या अन्य न्यायाधीश सेवानिवृति के बाद किसी अन्य हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट को छोड़कर उसी हाईकोर्ट में या अधीनस्थ न्यायालयों में वकालात नहीं कर सकते है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश व अन्य न्यायाधीश सेवानिवृति के बाद सरकार में कोई भी लाभ का पद ग्रहण नहीं कर सकते है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश व अन्य न्यायाधीश सेवानिवृति के बाद वकालात नहीं कर सकते व सरकार में कोई लाभ का पद ग्रहण नहीं कर सकते इसका उल्लेख भारतीय संविधान के भाग 6 के अनुच्छेद 220 में किया गया है। हाईकोर्ट के सेवानिवृत न्यायाधीश बैठक में भाग ले सकता है इसका उल्लेख भारतीय संविधान के भाग 6 के अनुच्छेद 225 में किया गया है।

 

हाईकोर्ट के न्यायाधीश का वेतन व भत्ते- हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश व अन्य न्यायाधीशों को वेतन व भत्ते भारत की संचित निधि से दिया जाता है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश व अन्य न्यायाधीशों के वेतन व भत्ते का उल्लेख भारतीय संविधान के भाग 6 के अनुच्छेद 221 में किया गया है। वर्तमान में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का वेतन 2,80,000 रुपये प्रति माह तथा अन्य न्यायाधीशों का वेतन 2,50,000 रुपये प्रति माह है।

 

हाईकोर्ट के न्यायाधीश का स्थानान्तरण- हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश व अन्य न्यायाधीशों के स्थानान्तरण का उल्लेख भारतीय संविधान के भाग 6 के अनुच्छेद 222 में किया गया है।

 

हाईकोर्ट का कार्यवाहक न्यायाधीश- कार्यवाहक न्यायाधीश का अर्थ है की जब हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त हो और जब तक मुख्य न्यायाधीश कि नियुक्ति नहीं की जाती है तब तक के लिये राष्ट्रपति के द्वारा कुछ समय के लिए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति कर सकता है। हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का उल्लेख भारतीय संविधान के भाग 6 के अनुच्छेद 223 में किया गया है।

 

हाईकोर्ट के कर्मचारी एवं अधिकारियों की नियुक्ति- हाईकोर्ट के कर्मचारी एवं अधिकारियों की नियुक्ति हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश करता है। हाईकोर्ट के कर्मचारी एवं अधिकारियों की नियुक्ति का उल्लेख भारतीय संविधान के भाग 6 के अनुच्छेद 229 में किया गया है।

 

हाईकोर्ट की कार्यवाही- हाईकोर्ट की कार्यवाही अंग्रेजी भाषा में होती है। होईकोर्ट की कार्यवाही का उल्लेख भारतीय संविधान के अनुच्छेद 348 में किया गया है।

 

हाईकोर्ट के द्वारा जारी रिट- हाईकोर्ट को रिट जारी करने का अधिकार है। हाईकोर्ट 6 प्रकार की रिट जारी कर सकता है। हाईकोर्ट को रिट जारी करने के अधिकार का उल्लेख भारतीय संविधान के भाग 6 के अनुच्छेद 226 में किया गया है।

 

एक हाईकोर्ट- एक राज्य में एक ही उच्च न्यायालय होगा इसका उल्लेख भारतीय संविधान के भाग 6 के अनुच्छेद 214 में किया गया है। लेकिन 7वां संविधान संशोधन अधिनियम 1956 के अनुसार भारतीय संविधान के भाग 6 के अनुच्छेद 231 में यह प्रावधाना किया गया है की संसद के द्वारा दो या दो से अधिक राज्यों या केन्द्रशासित प्रदेशों के लिए एक ही हाईकोर्ट की स्थापना की जा सकती है।

 

हाईकोर्ट में न्यायाधीश- हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश एक ही होता है तथा अन्य न्यायाधीश कितने भी हो सकते है।

 

हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश- हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश की नियुक्ति का उल्लेख भारतीय संविधान के भाग 6 के अनुच्छेद 224 में किया गया है। हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश की नियुक्ति हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश करता है।

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